1928 के जनवरी और फरवरी के महीनों में शहीद भगत सिंह भारत की आजादी के परवानो की जीवनीयां परचारेने और परसाने में जी जान से लगे थे। उस समय यह पत्र दिल्ली से प्रकाशित होने वाली पत्रिका महारथी को लिखा गया था। पहली बार देबारा प्रकाशित किया जा रहा है।
ਲਿਖਤਾਂ ‘ਜੇਲ ਨੋਟ ਬੁੱਕ’ ਵਿਚੋਂ ਇਕ ਸਫ਼ਾ
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